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𝕏@DrLaxman_Yadav
ये कितने डरावने दृश्य हैं! यही पुलिस सहानुभूति माँग रही थी कि “हमारा भी परिवार है।” तो जिन पर बर्बरता कर रहे हो, क्या उनका कोई परिवार नहीं? देश की जनता और नौजवानों से पेश आने का यही तरीक़ा है? अपनी पीड़ा पर इंसानियत याद आती है, दूसरों को पीड़ा देते वक़्त क्यों भूल जाते हो?Text captured from browser-embedRead the post